Poetry

Imagination

Sky- A stretch of cloudless blue endlessness. As if, an artist’s untouched canvas. Ocean- Endless, immovable blue chaos. As if, an ancient old man’s restless childhood. And I- Puzzled with the thought: Who is whose shadow? Lying on the rock when I look far- No boundaries on the horizon, no ends. Who starts where, where […]

Moon

There, moon-lit leaves- rustle, crackle and flicker. Your shimmering smile… Whites and shades- Like turns of playing Peek-a-boo. Your eyes and mine…

कल्पना

आकाश- मेघहीन, निरंतर नील असीमता । मानो, एक कलाकार की अनछुई कैनवास ।   समंदर- अनंत, अचल नील अस्थिरता । मानो, एक प्राचीन बूढ़े का चंचल बचपन ।   और मैं- उलझा पड़ा रहा इस सोच में- कौन है किसकी परछाई? पत्थर पर लेटे जब मैं दूर देखता हूँ- क्षितिज में कोई सीमारेखा नहीं, कोई विराम नहीं। कौन शुरू कहाँ, किसका अंत […]

क्रांति

क्रांति तुम हो इनके अधीन ! तुम्हें क्या लगा- ये काँटों के बाड़े इन्हें रोक पाएँगे ? ये हथियार तुम्हारे इन्हें डरायेंगे ? इनपर ये ज़ुल्म इन्हें तडपाएँगे ? इनकी ये चीखें दूसरों को रोकेंगे ? कितने गलत हो तुम- अरे, क्रांति तो मन से होता है, शरीर तो मात्र एक जरिया है. और कष्ट तो क्रांति की […]

टुकड़ों की ज़िंदगी

टुकड़ों की ज़िंदगी टुकड़ों में बिखरी पड़ी ये ज़िंदगी- एक हँसी का फव्वारा यहाँ तो, दो बूंद आंसुओं की नमी कहीं… पल कुछ ऐसे सोच-सोचकर जिन्हें- मुस्कान को कभी रोक न सके हम, पर हँसते हँसते पता नहीं कब रो पड़े हम…  

आज़ादी

आज़ादी ‘इन पंखों का बेताब फड़फड़ाना, इन नम आँखों का मिटमिटाना. ये दिनभर की बेचैन चीत्कार, ये निशब्द मानसिक हाहाकार. पापा, क्यों ये मैना है हमने रखा, दर्द हरपल है इन आँखों से टपका. प्लीज़, कर दो ना इसे आप आज़ाद, पहुंचे न पिंजरे तक अभी मेरे हाथ.’ ‘बेटा, बेकार है ये तुम्हारी धारणा, रोना […]

I have a Dream…

[This poem titled ‘I have a Dream…’,  if I remember well, was written by me on 19th September 2004. This creation comes from me at a time of my life, when I was bubbling with excitement of doing something, achieving something. That was when I was in 10th grade, the first time in India when […]

4 years of Life

How to pack 4 years of one’s life into 4 bags??   I wish not to pack these clothes, rather the memories of times I shopped them with friends… I wish not to pack these books, rather the times we spent as 5 people pouring over a single one… I wish not to pack my […]

Fate of A Dewdrop

A lone dewdrop from heaven falling down and down, no idea where it shall land- Would it be the beak of a bird, quenching its overnight thirst, diminishing itself for salvation? Would it be on a red rose, waiting to be plucked by a lover for his love, wiped by the lovely hands?